एक सच्ची कहानी पार्ट 1 l Ek Sachhi Kahani part 1
यह एक सच्ची घटना पर आधारित एक सच्ची कहानी है.
तो यह बात है 2018 का में कोलकाता मे एक COLLAGE HOSTEL में रहता था वह रहते हुये लगभग 6 महीने का समय बीत चूका था मेरा एक ROOMMATE था मिनिका तुंदु बड़ा ही अजीब बंदा था. वह एक आदिवासी परिवार से था उसका परिवार अभी भी जंगल में रहता था. उसके हाथ और गले पर बहुत सारे ताबीज और धागे बंधे हुये थे. वह बहुत कम बात किया करता था. पढाई में वह थोडा कमजोर था तो में उसकी पढाई में थोड़ी मदद कर दिया करता था क्योकि उसको पढने में बहुत रूचि था और इस वजह से हम दोनों अच्छे दोस्त बन गये थे और ज्यादातर समय साथ ही बिताया करते थे.
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| source Google image l photo by Markus Spiske |
अब तक सब सामान्य था एक रात 8 के समय दरवाजे की घंटी बजती है मैने दरवाजा खोला तो एक अजीब सा कम ऊंचाई और सवाले रंग का व्यक्ति दरवाजे के बहार खड़ा हुआ रहता है उसके हाथ और गले में भी बहुत सारे ताबीज और धागे बंधे हुये थे और दोनों हाथो में चुडिया पहन रखी थी जो मुझे बहुत अजीब लगा. वह व्यक्ति अजीब से डरावनी आवाज में बोलता है मिन्क्या है ? मैं थोडा हिचकिचाया और बोला आपका मतलब मिनका तन्दू से है ? जिसके जवाब में उसने अजीब मुस्कराहट के साथ हाँ में जवाब दिया.
मैने पुच्छा कौन है आप तो कड़क आवाज में जवाब आता है उसका बाप तो मैने बोला ठीक है आप मेरे पीछे पीछे आ जाओ. मिंका उस व्यक्ति को देख कर डर जाता है और उसे देख कर दुसरे कमरे की तरफ भागने की कोशिश में वह दिवार से टकरा जाता है और उसके सर से खून बहने लगता है जिसे देख कर मैं डर जाता ह परन्तु वह व्यक्ति हसने लगता है जो मेरे को बहुत अजीब लगा. मैं मिंका के पास जाता हु और उसको उठा कर कुर्सी पर बिठा कर उसके सर पर एक साफ कपडे से पट्टी बांध देता हु और इतने में मैने देखा की वह व्यक्ति जा चूका था. यह सब इतने अचानक से हुआ था की मैं कुछ भी समझ नही पा रहा था. मिंका डर से कापने लगा था जो देख कर मेरे को बहुत डर लग रहा था. रात बहुत हो चुकी थी जिसकी वजह से उसको डॉक्टर के पास जाने में भी डर लग रहा था. तो मैने उसे खाना खिला कर सुला दिया और सुबह होने का इंतजार करने लगा.
तो सुबह जब मैं नींद से उठा तो मैने महसुस किया की मिनका को तेज बुखार है तो मैने उससे बोला तुम आज आराम करो मैं आज अकेले ही COLLAGE चला जाता हूँ. इससे उसके चेहरे पर थोड़ी मायूसी छा जाती है तो मैने पूछा क्या हुआ तो वह बोला मेरे को अकेले छोड़ कर मत जाओ और मेरा हाथ पकड़ कर अपने पास बैठने को बोलता है. मैने मिंका को बहुत समझाया परन्तु वह नही माना और अंत मैं बोलता है मैं यहाँ अकेले नही रह सकता मैं भी तुम्हारे साथ COLLAGE चलता हूँ. उस दिन COLLAGE जाना जरुरी था तो मैने उसको बोला ठीक है चलो क्योकि उस दिन EXAM FORM डालना था तो मैने उसको बोला ठीक है चलो वैसे भी आज जल्दी आ जायेंगे और बाजार मैं डॉक्टर से दवा भी ले लेंगे तो वह जल्दी से तैयार हो जाता है और हम COLLAGE के लिये निकल जाते है.
उसकी आँखों मैं मुझे अभी भी डर दिखाई दे रहा था तो मैने उससे पुच्छा कल वह आदमी कौन था. यह सुन कर वह थोडा सा सहम जाता है जाता है तो मैने उसके कंधे पर हाथ रख कर फिर से पूछा डरने की बात नही है तुम मेरे को बता सकते हो तो धीमी आवाज मैं बोलता है BAPI ( BAPI का मतलब पिताजी ) था . मैने फिर से पूछा की वह तेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहे थे .........
तो वह बोला किसी को बताना मत. तो मैने उसको वादा दिया की यह बात मैं किसी को नहीं बताऊंगा. तो वह धीमी आवाज में बताने लगा की वह मेरा बाप है और 7 साल पहले बिना बताये कही चला गया तो मेरे को बहुत समय से परेशान कर रहा है और भी बहुत कुछ बताया परन्तु मैं उसकी भाषा को सही से समझ नही पा रहा था.
बातो ही बातो पता नही चला और मैं उससे थोडा आगे निकल गया और अचानक से मिंका जोर से चिल्लाता है तो में पीछे मुड कर देखा तो उसका बाप उसके सामने खड़ा था और उसके हाथ में कुछ धारदार कुछ था जिससे वह मिंका के गले पर बंधे हुये ताबीज को काटने लगता है जिससे मिंका के गले पर भी छोट लग जाती है और उसके गले से भी खून थोडा खून आने लगा था. यह देख कर मैं भी बहुत डर जाता हु फिर भी मैने हिम्मत जुटा कर उसके बाप को मिंका से दूर किया और गुस्से मैं जोर से धक्का मार कर रोड पर पटक देता हु और उसको भला बुरा कहने लगता हु क्योकि कल कल रात को मैं कुछ बोल नही पाया था उसका भी गुस्सा मेरे मैं भरा हुआ था.
इतने मैं मिंका मेरे पास आता है और मेरे को शांत करने की कोशिश करता है और मेरे मुहं मैं कुछ खाने के लिये डाल देता है जिससे मेरा गुस्सा शांत होता है और मोका देखकर उसका बाप वहा से भाग जाता है. जैसे तैसे मिंका को डॉ के पास ले जाता हु और उसके सर पर और गले पर पट्टी करा कर हम दोनों COLAGE का काम खत्म करके अपने हॉस्टल पहुचाते है.
आगे की कहानी पार्ट 2 मैं

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