एक टुटा इन्सान और उसके टूटे हुये सपने l EK TUTA INSAN OR USKE TUTE HUYE SAPNE.
यह कोई कहानी नही नही बल्कि समाज का अयना है जिसमे एक आम आदमी के जीवन मेंहोने वाले उतार चढाव के प्रारूप को दर्शाया जायेगा. समाज के उस छिपे हुये चहरे को उजागर किया जायेगा जहा इन्सान को उसके संसाधनों रंग और कपडे पहनने के आधार पर बाट दिया है. जहा इन्सान को एक अलग अलग स्तर पर मापने के मायने बने हुये है.
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| PHOTO BY Rupali Jadhav FROM Saripat Shabdancha |
जब एक कोई इंसानी रूप में जन्म लेता है उसी समय से उसको यह स्तरीय मापदंड का सामना करना पड़ता है कोई रंग के आधार पर बाट देता है तो कोई माँ बाप की सकल पर बात देता है कोई शरीर की बनावट के आधार पर बाट देता है तो कोई जाती धर्म के नाम पर बाट देता है. यह सब का सामना करते हुये वह भी समाज की इन्ही कुरीतियों का का हिस्सा बन का समाज की कुरीतियों मैं फलने फूलने लगता है. यह वही इन्सान है जो जन्म के समय सभी चीजो से अज्ञानी था और सब कुछ उसके लिये शून्य था ना जाने कब वह भी सामाजिक जहर अपने मैं घोल लेता है
इसी के साथ शुरू होता है एक इन्सान के टूटने का सफ़र. जब इन्सान सब घर बार छोड़ कर इस काले अन्धेरेनुमा संसार में अपना एक नया उज्जवल संसार बसने की उम्मीद लिये हुये निकलता है. जहा हर कोई उससे उस अन्धकार में डुबाये रखना चाहते है. बहुत कम होते है जो उस अन्धकार को पार कर पाते है परन्तु अधिकांश लोग फंसे रह जाते है अब छाहे उसे समय की मार कहे या निति का फैसला. जहा वहा सब जतन करने के बाद भी उस मुकाम तक नही पहुच पता जिसका वह कभी सपना देखा करता था. समय के साथ साथ वह सपना धुंधला होता जाता है. अब तक निराशा ने उसको सभी तरफ से घेर लिया है जहा से निकल पाना उसके समझ से बाहर हो जाता है और घुट घुट कर जीने लगता है जिसका अब एक मात्र उद्देश्य बच जाता है वह है अपना और अपने परिवार को किसी तरफ दो वक्त की रोटी दे पाना. वह अपने टूटे सपनो के बारे किसी के सामने जीकर नही करेगा क्योकि अब वह समाज समझने लगा है. यह वही समाज है जहा हर कोई उसके अधूरे सपने को हंसी का पात्र बना देगा.
टूटे इन्सान और उसके टूटे सपनो का दर्द उसके अलावा और कोई नही समझ सकता चाहे वह उसकी परिवार हो दोस्त हो रिश्तेदार हो सब उसको एक असफलता की मूर्ति बना देते है.
टूटे सपनो का दर्द उसे कभी चैन की नींद नही लेने देता है. यह उसे अंदर ही अंदर खाए जाता है जिससे वह दिन और टूटता जाता है. और अब उसे वह सब गलतीयों का अहसास होने लगता है जिसकी वजह से वह जिंदगी की दोड़ में इतना पीछे रह गया है. अब हाथ मलने के अलवा उसके पास और कोई चारा नही है.

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