एक टुटा इन्सान और उसके टूटे हुये सपने l EK TUTA INSAN OR USKE TUTE HUYE SAPNE.
यह कोई कहानी नही नही बल्कि समाज का अयना है जिसमे एक आम आदमी के जीवन मेंहोने वाले उतार चढाव के प्रारूप को दर्शाया जायेगा. समाज के उस छिपे हुये चहरे को उजागर किया जायेगा जहा इन्सान को उसके संसाधनों रंग और कपडे पहनने के आधार पर बाट दिया है. जहा इन्सान को एक अलग अलग स्तर पर मापने के मायने बने हुये है. PHOTO BY Rupali Jadhav FROM Saripat Shabdancha जब एक कोई इंसानी रूप में जन्म लेता है उसी समय से उसको यह स्तरीय मापदंड का सामना करना पड़ता है कोई रंग के आधार पर बाट देता है तो कोई माँ बाप की सकल पर बात देता है कोई शरीर की बनावट के आधार पर बाट देता है तो कोई जाती धर्म के नाम पर बाट देता है. यह सब का सामना करते हुये वह भी समाज की इन्ही कुरीतियों का का हिस्सा बन का समाज की कुरीतियों मैं फलने फूलने लगता है. यह वही इन्सान है जो जन्म के समय सभी चीजो से अज्ञानी था और सब कुछ उसके लिये शून्य था ना जाने कब वह भी सामाजिक जहर अपने मैं घोल लेता है इसी के साथ शुरू होता है एक इन्सान के टूटने का सफ़र. जब इन्सान सब घर बार छोड़ कर इस काले अन्धेरेनुमा संसार में अपना एक नया उज्जवल संसार बसने की...