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एक टुटा इन्सान और उसके टूटे हुये सपने l EK TUTA INSAN OR USKE TUTE HUYE SAPNE.
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यह कोई कहानी नही नही बल्कि समाज का अयना है जिसमे एक आम आदमी के जीवन मेंहोने वाले उतार चढाव के प्रारूप को दर्शाया जायेगा. समाज के उस छिपे हुये चहरे को उजागर किया जायेगा जहा इन्सान को उसके संसाधनों रंग और कपडे पहनने के आधार पर बाट दिया है. जहा इन्सान को एक अलग अलग स्तर पर मापने के मायने बने हुये है. PHOTO BY Rupali Jadhav FROM Saripat Shabdancha जब एक कोई इंसानी रूप में जन्म लेता है उसी समय से उसको यह स्तरीय मापदंड का सामना करना पड़ता है कोई रंग के आधार पर बाट देता है तो कोई माँ बाप की सकल पर बात देता है कोई शरीर की बनावट के आधार पर बाट देता है तो कोई जाती धर्म के नाम पर बाट देता है. यह सब का सामना करते हुये वह भी समाज की इन्ही कुरीतियों का का हिस्सा बन का समाज की कुरीतियों मैं फलने फूलने लगता है. यह वही इन्सान है जो जन्म के समय सभी चीजो से अज्ञानी था और सब कुछ उसके लिये शून्य था ना जाने कब वह भी सामाजिक जहर अपने मैं घोल लेता है इसी के साथ शुरू होता है एक इन्सान के टूटने का सफ़र. जब इन्सान सब घर बार छोड़ कर इस काले अन्धेरेनुमा संसार में अपना एक नया उज्जवल संसार बसने की...
एक सच्ची कहानी पार्ट 1 l Ek Sachhi Kahani part 1
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यह एक सच्ची घटना पर आधारित एक सच्ची कहानी है. तो यह बात है 2018 का में कोलकाता मे एक COLLAGE HOSTEL में रहता था वह रहते हुये लगभग 6 महीने का समय बीत चूका था मेरा एक ROOMMATE था मिनिका तुंदु बड़ा ही अजीब बंदा था. वह एक आदिवासी परिवार से था उसका परिवार अभी भी जंगल में रहता था. उसके हाथ और गले पर बहुत सारे ताबीज और धागे बंधे हुये थे. वह बहुत कम बात किया करता था. पढाई में वह थोडा कमजोर था तो में उसकी पढाई में थोड़ी मदद कर दिया करता था क्योकि उसको पढने में बहुत रूचि था और इस वजह से हम दोनों अच्छे दोस्त बन गये थे और ज्यादातर समय साथ ही बिताया करते थे. source Google image l photo by Markus Spiske अब तक सब सामान्य था एक रात 8 के समय दरवाजे की घंटी बजती है मैने दरवाजा खोला तो एक अजीब सा कम ऊंचाई और सवाले रंग का व्यक्ति दरवाजे के बहार खड़ा हुआ रहता है उसके हाथ और गले में भी बहुत सारे ताबीज और धागे बंधे हुये थे और दोनों हाथो में चुडिया पहन रखी थी जो मुझे बहुत अजीब लगा. वह व्यक्ति अजीब से डरावनी आवाज में बोलता है मिन्क्या है ? मैं थोडा हिचकिचाया और बोला ...
मेरे जीवन के संघर्ष की पहली कहानी l Mere jivan ke sangharsh ki pahali kahani
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सभी को मेरा प्यार भरा नमस्ते और धन्यवाद मेरी कहानी पड़ने के लिए.☺ आज की कहानी मेरे जीवन के उन संघर्षपूर्ण दिनों की है जब मेरे जीवन का सबसे मुश्किल दौर चल रहा था तो चलिए शुरू करते है Image source - Google Image by -hindibate.com मेरा नाम है दीपक मेरी जिंदगी का सफ़र शुरू होता है जयपुर एक छोटे से गाँव से तारीख 17-09-1995. मेरे परिवार में मेरे दो बड़े भाई मम्मी पापा और दादाजी रहते थे. एक सामन्य सा मध्यमवर्गीय परिवार जिसको पालने का पूरी जिम्मेदारी मेरे पिताजी जिनका नाम राम प्रसाद योगी था. वह एक लोहे के कारखाने में कम किया करते थे जिनकी तन्खा से परिवार बहुमुश्किल से चल पाता था. ऐसे ही समय गुजरता चला गया और मेरी उम्र अब 10 साल हो चुकी थी और साथ ही पिताजी की उम्र ढलने लाही थी अब उनका स्वास्थ्य भी ख़राब रहने लगा था. मेरे को अब समझ आने लगा था की मेरे परिवार की आर्थिक स्थति ठीक नही है इसलिए मैंने भी पढाई छोड़ कर कोई नौकरी करने का मन बना लिया था. उस समय बाल मजदूरी को क़ानूनी रूप में अपराध नही माना जाता था जिससे मुझे कम उम्र म...